देश की सेना कमजोर कब थी? क्या 1965, 1971 के युद्ध को भुल गए जब पाकिस्तान को धुल चटाया था?

देश की सेना कमजोर कब थी? क्या 1965, 1971 के युद्ध को भुल गए जब पाकिस्तान को धुल चटाया था?

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क्या हमारी देश की सेना कमजोर थी? क्या देश की सरकार कमजोर थी? तो कब थी? आज इसलिए यह सवाल उठाना जरूरी हो गया हैं कि अक्सर देखा जाता है प्रधानमंत्री मोदी चुनावी रैलियों और जनसभाओं में इस बात का जिक्र करते हैं। मैं कई जनसभाओं में सुन चुका हूँ । भारतीय नागरिंक होने के नाते सुनकर दुख भी होता है कि लोकतंत्र में एक चुने हुए प्रधानमंत्री अपने देश और देश की सेना के बारे में ऐसा कैसे कह सकते है? क्या इससे विश्व स्तर पर भारत की छवि कमजोर नही होता?

कभी कभी ऐसा लगता है शायद प्रधानमंत्री मोदी को देश के इतिहास भूगोल के बारे में जानकारी नही होगी, लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है देश के प्रधानमंत्री को देश का इतिहास और देश के शॉर्य मालूम ना हो? खैर जो भी हों मैं एक भारतीय नागरिक हू और मुझे कतई बर्दाश्त नहीं है हमारे देश के प्रधानमंत्री देश के पूर्व सरकार में रहें पूर्व सेना अधिकारी की ताकत को कमजोर आँके। कतई बर्दाश्त नही किया जा सकता है। मैं प्रधानमंत्री मोदी के ज्ञान में थोड़ा इजाफा करना चाहता हूँ, उनको बताना चाहता हूँ, इतिहास याद दिलाना चाहता हूँ। पूर्व में रहें प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री जी के कार्यकाल में यानि 1965 के दौरान भारत और पाकिस्तान में यूद्ध हुआ था, जिसमें उस समय की सरकार और सेना पाकिस्तान को धूल चटाया और ऐसा धुल चटाया कि पाकिस्तान को कुछ देर तक सोचना पड़ गया और मजबुर हो गया है कि अपने लाहौर और सियालकोट को कैसे बचाऐ। ऐसी हालत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के साथ कर दिया,क्या पीएम मोदी को उस समय की सेना और सरकार कमजोर दिखती है? क्या जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादूर शास्त्री की सरकार उनको कमजोर नजर आता है? क्या लाहौर तक भारतीय सेना को घुसरकर भारत जिंदाबाद के नारे लगाकर वापस आना कमजोर सेना और सरकार की निशानी है? जरा पीएम साहब बताईऐ ना देश की सेना कमजोर थी कब?

1965 ई० में हुए युद्ध के बाद दोबारा इंदिरा गांधी की सरकार में 1971 ई० में भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ। क्या पीएम मोदी को 1971 में हुए युद्ध के बारे में पता नहीं है? जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घूसकर तबाही मचाया, 93 हजार पाकिस्तानी आर्मी को भारतीय सेना ने बंदी बनाया, अपने दम और ताकत के बदौलत भारत ने पाकिस्तान के दो टूकड़े करके एक बंग्लादेश बनाया। क्या पीएम मोदी इस इतिहास और भारतीय सेना और पूर्व के सरकारों की पराक्रम और शोर्य को भूल गई? क्या उनको यह जानकारी नहीं है? जब भारतीय सेना लाहौर तक घूसरकर तिरंगा फहरा दिया फिर भी इसका श्रेय किसी सेना और सरकार ने नहीं लिया? आज एक कारवाई करतें है तो ढोल नगांडे पीट पीटकर मोदी सरकार श्रेय लेती है।

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प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 1950 में हुआ, जबकि 1947 में देश आजाद हुआ, 1942 में देश की सेना का गठन हो चुका था। क्या प्रधानमंत्री को गर्व नही होता जब उनका जन्म भी नही हुआ था तब देश की सेना मजबूत और सश्कत सेना बन चुकी थी? पीएम मोदी जब पंद्रह से 22 साल के हुए होंगे उस वक्त पाकिस्तान को दो बार भारतीय सेना परास्त कर चुकी थी. यूद्ध में हरा चुका था। क्या मोदी को गर्व नहीं होता देश की सेना के शॉर्य पर? हाल के दिनों में तेलगानां के सीएम ने एक खुलासा किया और बताया कि मनमोहन सिंह के सरकार में ग्यारह सर्जिकल स्ट्राइक’ पाकिस्तान पर भारतीय सेना ने किया. क्या आपको गर्व नही हुआ? जबकि आपको तो याद ही होगा ये तेलगानां के सीएम वहीं है जिन्होनें राष्ट्रपति चुनाव में आपके ही एनडीए उम्मीदवार का समर्थन किया था। मेरा एक सलाह है भारतीय नागरिक होने के नाते विपक्ष पर आरोप लगाने के चक्कर में इतना नीचले स्तर की राजनीती मत किजिऐ जिससे सेना के पराक्रम को नीचा देखा जाए? सेना के शॉर्य पर सवाल किया जाए? सेना को शक के नजर से देखा जाए? खैर अब देश की जनता को फैसला करना है वे क्या चाहते है किसे चुनते है। लोकतंत्र है सबका अधिकार है सबका हक है। लेकिन भारत के इतिहास बहुत बड़ा है और इसे जिस तरह से भूलाने और मिटाने की कोशिश की जा रही है यह लोकतंत्र में बिल्कुल भी सही नही कहा जा सकता है।

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